Neem Karoli Baba Biography In Hindi- नीम करौली बाबा कौन थे ?

नीम करोली बाबा एक ऐसा नाम जो की भारत ही नहीं विदेशो में भी प्रसिद्ध है  तो आज हम neem karoli baba biography in hindi में बतायेगे और साथ में इनके चमत्कार के बारे में आपको बतायेगे क्युकी बाबा को कलयुग में मोक्ष के रास्ते ले जाने का द्वार है |

जिनकी फोटो अक्सर आप कही न कही जरूर देखे होंगे या फिर अपने अपने पूर्वजो दादा , दादी से इनके चमत्कार के बारे में बचपन में जरूर सुना होगा या फिर सोशल मीडिआ पर नीम करोली बाबा के बारे में जरूर सुने होंगे |

तो आज के इस आर्टिकल में हम नीम करोली बाबा के बारे में चर्चा करेंगे और इनके आश्रम और चत्मकार के बारे में आपको बतायेगे तो चलिए आपको विस्तार से बताते है |

neem karoli baba biography in hindi
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नीम करौली बाबा कौन थे ?

नीम करोली बाबा एक चमत्कारिक बाबा थे जो हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे और बहुत से भक्त उन्हें हनुमान जी का ही अवतार मानते थे | उत्तराखंड में इनका एक प्रसिद्ध आश्रम है जिसका नाम कैची धाम आश्रम है ,जो की समुद्र तल से 1400 मीटर की ऊंचाई पर नैनीताल अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित है |

नीम करोली बाबा की गिनती 20 वीं सदी के महान संतो में की जाती है और इसका कारण इनकी प्रसिद्धि और चमत्कार ही है जो की इनके भक्त इनके बैकुंठ धाम लौटने के बाद भी इन्हे आज भी याद किया जाता है |

नीम करोली बाबा को मात्र 17 वर्ष की ही आयु में ईश्वर के बारे में बहुत से विशेष ज्ञान हो गया था , और हनुमानजी को अपना आराध्य और गुरु मानते थे इन्होने हनुमान जी के 108 मंदिरो की स्थापना की |

 

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प्रसिद्ध नाम –   नीम करोली बाबा 
वास्तविक नाम – लक्ष्मी नारायण शर्मा 
पिता का नाम – दुर्गा प्रसाद शर्मा 
बाबा के अन्य नाम – हांड़ी वाले बाबा , तिकोनिया वाले बाबा , लक्ष्मण दास , तलैया बाबा 
जन्म स्थान – अकबरपुर ( फैज़ाबाद ) अम्बेडकर नगर , उत्तर प्रदेश , भारत  
जन्म तिथि – 11 सितम्बर 1900
नीम करोली बाबा का स्थान – कैंची धाम आश्रम , नैनीताल , उत्तराखंड 
समाधि स्थल – पंतनगर , नैनीताल 

नीम करोली बाबा एक प्रसिद्ध बाबा थे जिनका वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था , इनका जन्म 11 सितम्बर 1900 को  उत्तरप्रदेश के फैज़ाबाद जिला  ( जिसका अब नाम अम्बेडकरनगर हो गया है ) के अकबरपुर गांव में हुआ था | इनके पिता का नाम दुर्गा प्रशाद शर्मा था | नीम करोली बाबा बचपन से ही हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे , जब 17 वर्ष की आयु के थे तब ही इन्हे ईश्वर के बारे काफी ज्ञान हो गया था |

इनके पिता ने बाबा विवाह मात्र 11 वर्ष की आयु में कर दिया था , 1958 में बाबा ने घर को त्याग करके साधुओ की भांति पुरे भारत में विचरण करने लगे | उस समय इन्हे कई नामो से इनके भक्त पुकारने लगे हांड़ी वाले बाबा , तिकोनिया बाबा , लक्ष्मण दास , तलाइवा बाबा |

इन्हे इस कलयुग में एक दिव्य पुरुष के रूप में मानते है जिसके बाद विचरण करते हुए उत्तराखंड पहुंचे जहाँ इन्होने तपस्या की और अपना एक प्रसिद्ध धाम बनाया जो कैंची धाम से प्रसिद्ध है | बाबा ने कठिन तपस्या करके सिद्धि हासिल की थी |

कैंची धाम उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध धाम है जहाँ आज भी बाबा के लाखो भक्त जून में वार्षिक समारोह में सम्मिलित होते है जिसमे पुरे भारत ही नहीं विदेशो से भी इनके भक्त इस समारोह में आते है |

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बाबा नीम करोली ने 11 सितम्बर 1971 को वृंदावन में 71 वर्ष की आयु में अपना देह त्याग दिया था जिनका समाधी स्थल पंतनगर नैनीताल में है |

नीम करौली बाबा में ट्रैन रोके जाने का रहस्य

एक बार की बात है बाबा जी ट्रैन में फर्स्ट क्लास कोच में यात्रा कर रहे थे लेकिन किसी कारण उनके पास टिकट नहीं था जब टीटी आया तो इन्हे अगले स्टेशन नीम करोली में उतार दिया उसके बाद की घटना किसी चमत्कार से कम नहीं था बाबा अपना चिमटा गाड़ के वही बैठ गए |

जिसके बाद ऑफिसर ने ट्रैन चलने का इशारा गार्ड को दिया , उसके बाद गार्ड ने हरी झंडी दिखाई लेकिन ट्रैन थोड़ी सी भी आगे नहीं बढ़ी | बहुत ही प्रयत्न के बाद भी ट्रैन नहीं चली जिसके कारण ट्रैन ड्राइवर हैरान हो गया की अभीतक तो ट्रैन ठीक चल रही थी आखिर इस स्टेशन पर ऐसा क्या हुआ की ट्रैन आगे नहीं बढ़ रही |

उसी ट्रैन में ड्राइवर के साथ एक लोकल मजिस्ट्रेट बाबा को जानता था जिसके बाद उस ने बाबा को अंदर बैठने को कहा और बाबा के अंदर बैठते ही ट्रैन चलना शुरू हो गयी तब ऑफिसर को अहसास हुआ की इन्होने कोई आम आदमी से नहीं किसी सिद्ध पुरुष से पंगा लिया था फिर उस टीटी ने बाबा से माफ़ी मांगी |

इस घटना के बाद से ही बाबा का नाम नीम करोली बाबा हो गया क्युकी जिस स्टेशन पर यह चमत्कार हुआ था उस स्टेशन का नीम करोली था तब से पुरे भारत में नहीं विदेशो में भी बाबा को नीम करोली बाबा के नाम से जाना जाने लगा |

नीम करौली बाबा का गृहस्थ जीवन

नीम करोली बाबा का गृहस्थ जीवन बचपन में बहुत ही सामान्य था और इनके पिता चाहते थे की बाबा पढ़ लिख कर गृहस्थ जीवन जीए | लेकिन नीम करोली बाबा को धार्मिक कार्यो में काफी रूचि थी जिस वजह से इन्होने 1958 में अपना घर और गृहस्थ जीवन को त्याग कर संतो की तरह भारत भ्रमण पर निकल गए |

 

नीम करौली बाबाने क्यों की कैंची धाम की स्थापना

नीम करोली बाबा ने गृहस्थ जीवन को त्याग कर कैची धाम की स्थापना की क्युकी नीम करोली बाबा अनेको स्थान पर भ्रमण किया और 100 से अधिक आश्रम का निर्माण करवाया |

लेकिन अपने जिंदगी के आखिरी दशक में कैची धाम में अधिक समय व्यतीत किया और  इन्होने कैंची धाम की स्थापना 1964 में करवाया जो की उत्तराखंड के नैनीताल से 17 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा – नैनीताल रोड पर स्थित है |

नीम करोली बाबा के देश में अनेक आश्रम है , जिसमे कैंची धाम और वृंदावन धाम इनका प्रमुख आश्रय था और अपने जिंदगी के आखिरी समय में इन्ही दो जगह पर ज्यादा समय व्यतीत किये |

 

 

नीम करौली बाबा का देह त्याग

नीम करोली बाबा कैंची धाम से आने के बाद वृंदावन में अपना देह त्याग किया जिस वजह से बाबा का कैंची धाम के बाद ये दूसरा प्रमुख आश्रम है | बाबा नीम करोली ने 11 सितम्बर 1971 को वृंदावन में 71 वर्ष की आयु में अपना देह त्याग दिया था |

 

नीम करौली बाबा का स्थान कहाँ है और कैसे जाये ?

नीम करोली बाबा का प्रमुख स्थान कैची धाम है जो की उत्तराखंड के नैनीताल में है क्युकी नैनीताल पहाड़ो से घिरा और बहुत ही शांत स्थान है जिस वजह से बाबा ने अपना आखिरी समय के साल यही पर बिताया और यही पर अपनी तपस्या किया करते थे |

कैंची धाम जाने को लिए आपको अपनी कार से या प्राइवेट टैक्सी से  उत्तराखंड के नैनीताल शहर जाना होगा और नैनीताल से कैची धाम 20 किलोमीटर की दुरी पर है |

ट्रैन से जाने के लिए आपको कैची धाम के सबसे निकट स्टेशन  (काठगोदाम रेलवे स्टेशन) तक जाना होगा उसके बाद आपको यह से एक प्राइवेट टैक्सी बुक करनी होगी जो की आपको काठगोदाम से कैंची धाम तक पंहुचा देगी जिसकी दुरी 38 किलोमीटर है | जिसमे आपको लगभग 1 घंटा 30 मिनट का समय लग सकता है |

हवाई मार्ग से कैची धाम जाने को लिए आपको हवाई यात्रा मार्ग से पंतनगर एयरपोर्ट तक आ सकते है जिसके बाद एयरपोर्ट से कैंची धाम के लिए प्राइवेट टैक्सी बुक करनी होगी जो की पंतनगर एयरपोर्ट से कैची धाम की दुरी 72 किलोमीटर है जिसमे आपको 2 घंटे 30 मिनट तक का समय लग सकता है |

तो ये थे कुछ मार्ग कैंची धाम जाने के जो की आप आसानी से अपनी सुविधा अनुसार इस धाम तक पहुंच सकते है और यहां पर बाबा के धाम को देख सकते है |

कैंची धाम की स्थापना 15 जून को हुई थी जिस वजह से हर साल इसकी वर्ष गांठ 15 जून को मनाई जाती है जिसमे विशाल भंडारा और भव्य मेले का आयोजन होता है जिमे भारत के साथ साथ विदेशो से बाबा के भक्त हर साल इस धाम पर आते है |

 

नीम करौली बाबा का चमत्कार

नीम करोली बाबा हनुमान जी के सच्चे भक्त थे इन्होने कई चमत्कार अपने जिंदगी में किये जिसमे इनका एक चमत्कार काफी प्रसिद्ध है जब अंग्रेजो के समय ये ट्रैन से यात्रा कर रहे थे तो इनके पास टिकट नहीं था तो टीटी ने इन्हे ट्रैन से स्टेशन पर उतार दिया था और बाबा स्टेशन पर ही तपस्या मुद्रा में बैठ गए लेकिन जब ट्रैन ड्राइवर ने ट्रैन को चलाना शुरू किया तो ट्रैन थोड़ा सा भी आगे नहीं चली |

ट्रैन ड्राइवर काफी परेशान हो गया आखिरकार ट्रैन इस स्टेशन पर रोकते ही क्या हो गया लेकिन उसी में एक सहायक ड्राइवर था जो की नीम करोली बाबा को जानता था तो उसने बाबा को बैठने को कहा जिसके बाद बाबा के ट्रैन पर बैठते ही ट्रैन चलना शुरू हो गयी और तब से बाबा के इस चमत्कार से सभी यात्री अचम्भित हुए और तब से उस स्टेशन के नाम पर ही बाबा का नाम नीम करोली बाबा पड़ गया |

रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) ने नीम करोली बाबा के चमत्कारों पर ‘मिरेकल ऑफ़ लव’ नामक एक किताब लिखी इसी में ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ नाम से एक घटना का जिक्र है। जो की इनके इस चमत्कार की वजह से विदेशो में भी इनके भक्त बन गए | और इस किताब में बाबा के अनेको चमत्कार पढ़ने को मिल सकते है |

नीम करोली बाबा मंत्र

“मैं हूं बुद्धि मलीन अति श्रद्धा भक्ति विहीन ।
करू विनय कछु आपकी, होउ सब ही बिधी दिन।
कृपासिंधु गुरुदेव प्रभु। करि लीजे स्वीकार।”

इस मात्रा का जाप करके आप नीम करोली बाबा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है |

नीम करोली बाबा की प्रार्थना कैसे करें

नीम करोली बाबा की प्रार्थना करने के लिए बाबा का एक मंत्र पढ़ना होता है जो की निम्न लिखित है – इस मंत्र का जप करने से बाबा की कृपा और आशीर्वाद अपने भक्तो पर बनी रहती है |

मैं हूँ बुद्धि मलीन अति, श्रद्धा भक्ति विहीन ।
करू विनय कछु आपकी, होउ सब ही विधि दीन।।
श्रद्धा के यह पुष्प कछु। चरणन धरि सम्हार।।
कृपासिंधु गुरुदेव प्रभु। करि लीजे स्वीकार।।

बाबा नीम करोली की सच्ची घटना भक्तो के द्वारा –

मैं यह केवल पढ़ी या सुनी बातों के आधार पर नही बल्कि स्वयं के अनुभवों के आधार पर कह रहा हूं। बाबाजी महाराज का मैं 1994 से परम भक्त रहा हूं और उनके स्वेच्छा से 11 सितंबर 1973 के दिन निर्वाण के पश्चात सिद्धि मां महाराज ने बाबाजी का शेष कार्य संभाला और हजारों भक्तों का कल्याण वैसे ही किया जैसे कि बाबा नीम करौल जी महाराज जी करते थे।

सिद्धी मां ने भी अपना पार्थिव शरीर कुछ वर्ष पहले छोड़ दिया है।बाबाजी महाराज इस युग में हनुमान जी के अवतार माने जाते हैं और उनका प्रकृति के पंच भूतों पर पूर्ण अधिकार था और अष्ट सिद्धि नव निधि से पूर्ण काम संत हैं (हम महाराज जी के भक्त उनके लिए ’थे’ शब्द का प्रयोग नहीं करते) ।

सच्चाई यह है कि ऐसे अति उच्च कोटि के सिद्ध संतों की तपोस्थलियां स्वयं में इन्ही संतो का रूप बन जाती हैं और अवश्य ही इन स्थलियों पर सच्चे मन और सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना कभी भी व्यर्थ नहीं हो सकती।ऋषिकेश के अति प्रसिद्ध और सिद्ध संत स्वामी शिवानंद जी ने महाराज जी के बारे में कहा था,

“नीम करौली जी संतो के संत हैं और उनमें पूर्ण सिद्धियां है। संतो में अलग अलग विशेषताएं होती हैं किंतु उनमें सभी संतो की सिद्धियां समाहित हैं। केवल यही संत ऐसे हैं जो जीवन दान देने की भी क्षमता रखते हैं” –

प्रोफेशर डॉक्टर ओ पी शर्मा 

अंत में –

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